Stories For Kids : 2 Short Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चों की कहानियां

Short Moral Stories For Kids In Hindi : नमस्कार दोस्तों, स्पीड इंडिया 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. इस पोस्ट में हम आपके लिए “Stories For Kids : 2 Short Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चों की कहानियां” की जानकारी लेकर आये है. उम्मीद है आपको हमारे द्वारा शेयर की जा रही Top 2 Stories For Kids In Hindi आपको पसंद आयेगी.

कामचोर गधा और व्यापारी : Short Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चों की कहानियां

एक गाँव में एक व्यापारी रहता था | उसका नमक का कारोबार था | वो रोज अपने गधे के साथ शहर जाता और नमक बेचकर अपना गुजर करता था | शहर के रास्ते के बिच एक छोटी से नदी पड़ती थी | व्यापारी और गधे को शहर जाने के लिए रोज़ वो नदी पार करनी पड़ती थी | एक दिन जब वो दोनों नदि पार कर रहे थे | तब अचानक गधे का पैर फिसल गया | और वो नदी में ही गिर गया | लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी जो उस व्यापारी ने उसे बचा लिया |

लेकिन नदी में गिरने के कारण गधे पर रखा नमक पानी में पूरा धुल चूका था | अब शहर जाने का कोई काम नहीं था | गधा बहुत खुश हुआ क्योकि अब उसे वो वजन उठाकर शहर जाना नहीं पड़ रहा था | लेकिन व्यापारी बिचारा बहुत दुखी हुआ क्योकि उसका पूरा नमक पानी में बह चूका था | अगले दिन फिर से व्यापारी नमक गधे पर रख कर शहर की और निकला | जैसे ही नदी आई गधा जान बुजकर नदी में गिर गया |

व्यापारी ने उसे बाहर निकाला | गधा फिर बहुत खुश हुआ | लेकिन इस बार व्यापारी को पता चल चूका था की गधा जान बुजकर ऐसा कर रहा है | व्यापारी ने गधे को सबक सिखाने के लिए एक योजना बनायीं | अगले दिन जब वह फिर से शहर की और निकला तब उसने गधे पर एक बहुत बड़ा रुई का गट्ठा बांध दिया |

अब जब नदी आई तो गधा फिर से जान बुजकर गिर गया | और व्यापारी इस बार भी उसे बाहर निकाल दिया | लेकिन गधे द्वारा नदी में गिरने से अब रुई में पानी इक्कता हो चूका था | जिससे गधे की पिट पर बहुत ज्यादा वजन हो चूका था | अब तो गधे से चला भी नहीं जा रहा था | जब गधा आगे नहीं चल रहा था तब व्यापारी ने उसकी खूब पिटाई की | इसके बाद गधे ने कभी भी पानी में गिरने की कोशिश नहीं की |

Moral : हमें अपना काम पूरी ईमानदारी और लगन के साथ करना चाहिये | 

चमत्कारी चक्की : Short Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चों की कहानियां

एक गाँव में दो भाई आपने-अपने परिवार के साथ रहा करते थे | बड़ा भाई बहुत अमीर था | लेकिन छोटा भाई बहुत गरीब था | कुछ समय बाद दिवाली का त्यौहार का त्यौहार आया | पुरे गाँव में दिवे का त्यौहार बड़े ही धूम-धाम से मनाया जा रहा था | लेकिन छोटे भाई के पास तो खाने के लिए भी कुछ नहीं था | वो मदद मांगने के लिए अपने बड़े भाई के पास गया | लेकिन बड़े भाई ने उसे बेइज्ज़त करके घर से बाहर निकल दिया | वो उदास और रोता हुआ घर जा रहा था |

लेकिन अच्चानक रास्ते में उसे एक बुड्डा आदमी दिखाई दिया | बुड्डे आदमी के पास लकड़ियों का एक गठर था | उस बुड्डे आदमी ने उससे पूछा बेटा आज तो दिवाली है तुम्हे तो खुश होना चाहिये तुम रो क्यों रहे हो | उसने कहा काहे की दिवाली ताऊ मुझे मदद की बहुत जरुरत थी | आज घर पर खाने के लिए भी कुछ नहीं है | और अब तो मेरे भाई ने भी मेरी मदद नहीं की |

मेरा परिवार भूखा मर रहा है और में कुछ भी नहीं कर पा रहा | उस बुड्डे आदमी ने कहा यदि तुम इन लकड़ियों के गठर को मेरे घर ले जाने में मेरी मदद करो तो में तुम्हे जो दूंगा उससे तुम अमीर हो जाओगे | छोटा भाई बुड्डे के पिच चलता हुआ | लकड़ियों के गठर को उसके घर छोड़ आया | 

बुड्डे ने छोटे भाई को एक मालपुआ दिया और बोला – जंगल में जाने एक जगह तुम्हे तीन तरह के अजीब पेड़ तुम्हे दिखेंगे | जिसके पास ही एक चट्टान होगी | ध्यान से देखोगे तो तुम्हे उस चट्टान के कोने में एक गुफा दिखाई देगी | गुफा में चले जाने वहा तीन बोने रहते है | मालपुआ उन्हें बहुत पसंद है | वह तीनो बोने तुम्हे इस मालपुआ की कुछ भी किम्मत दे सकते है | तुम उन बोनो से धन मत मांगना | बल्कि बोलना की तुम्हारे पास जो पत्थर की चक्की है वो मुझे दे दो |

छोटा भाई गुफा में गया | उसे बहा पर तीन बोने दिखाई दिए | वहा एक बोने ने उसके हाथ में मालपुआ देख कर कहा – तुम ये हमें दे दो बदले में जो चाहे ले लो | छोटे भाई ने तुरंत ही कहा आपके पास जो पत्थर की चक्की है वो दे दो | छोटा भाई चक्की लेकर निकल ही रहा था | की एक बोना बोला – इस चक्की को साधारण चक्की मत समझना | इस चक्की को गुमाने पर तुम जो कुछ भी मांगोगे | इससे निकलता रहेगा |  इच्छा पूरी होने पर इसपर लाल रंग का कपड़ा डाल देना | और छोटा भाई बुड्डे के बताये अनुसार वो चक्की अपने साथ ले आया |

छोटा भाई अब सीधे घर जाता है | घर पर जाते ही वो अपने पत्नी से बोलता है | यहाँ पर एक कपड़ा बिछाओ | छोटे भाई ने कपड़े के एक कोने में चक्की को रख कर बोला – चक्की चक्की चावल निकाल | चक्की ने चावल निकालने शुरू कर दिए | जरुरत के मुताबित चावल निकल जाने के बाद उसने उसपर लाल कपड़ा रख दिया | अब उसने उस चक्की से दाल निकाली | उस रात उसके परिवार ने दाल चावल बनाकर खाये और चेन की नींद सो गए |

अगले दिन बचे हुआ चावल और दाल को छोटा भाई बाज़ार में बेच आया | जिससे उसे कुछ पैसे भी मिल गए | अब वो उस चक्की से बाकि की सारी सामग्री भी निकालने लगा और उन सभी को वो बाज़ार जाकर बेच आता | कुछ ही समय बाद छोटा भाई बड़े भाई से अमीर हो गया | छोटे भाई की तरक्की बड़े भाई के गले से ना उतरी | बड़े भाई ने सोचा अभी तो कुछ दिन पहले ये खाने के लिए भी तरस रहा था और आज मुझसे भी अमीर जैसे बन गया |

बड़े भाई ने एक योजना बनाई और एक रात वो चुपचाप छोटे भाई के घर में छुप गया | बड़े भाई को अब पता चल चूका था की छोटा इतना धनी कैसे हुआ है | अगले दिन जा छोटा भाई सामान बेचने बाज़ार गया तब बड़े भाई ने चुपके से उस चक्की को चुरा लिया | चक्की चुरा कर वो घर गया और अपने परिवार को लेकर दूर टापू में बसने के इरादे से वो गाँव छोड़कर निकल गया | 

बड़े भाई ने एक नाव खरीदी | सभी उस नावव में बैठकर टापू की और चल दिए | बड़े भाई की पत्नी अभी भी सोच रही थी की एक पत्थर की चक्की के कारण ये क्यों अपना सब कुछ पीछे छोड़ आये | पत्नी की परेशानी को दूर करने के लिए उसने चक्की को घुमाया और बोला चक्की-चक्की नमक निकाल | अब होना क्या था बड़े भाई को चक्की को रोखना का उपाय तो पता नहीं था | अब नाव में नमक का ढेर लगना शुरू हो गया | और नाव समुंद्र में ही डूब गयी | नाव के साथ-साथ उन सभी की भी जल समाधी बन गयी | इस कहानी के अनुसार कहते है की चक्की आज भी गुम रही है | तभी तो समुन्द्र का पानी खारा है |

Moral : लालच करना बुरी बात है | हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिये |


प्रिय पाठक : उम्मीद है आपको हमारे द्वारा शेयर की गयी “Stories For Kids : 2 Short Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चों की कहानियां” आपको पसंद आई होगी |

निवेदन : यदि आपको Short Moral Stories For Kids In Hindi की हमारी ये जानकारी पसंद आई हो तो Please इन कहानियों को शेयर जरुर करे. और अगर आपको कुछ कहना हो तो निचे कमेंट करे |

ये कहानियां आपके लिए है :-

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *