बीरबल की खिचड़ी | अकबर बीरबल की कहानी | Akbar Birbal Stories In Hindi

Akbar Birbal Stories In Hindi : नमस्कार दोस्तों, स्पीड इंडिया 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. आज हम आपके लिए एक ऐसी कहानी लेकर आये है जो आपको आपके बचपन के दिनों की याद दिला देगी. इस आर्टिकल में हम आपके लिए “बीरबल की खिचड़ी | अकबर बीरबल की कहानी | Akbar Birbal Stories In Hindi” के जानकारी लेकर आये है. शायद ही ऐसा कोई बच्चा होगा जिसने अपने बचपन में बीरबल की कहानियां नहीं सुनी होगी. मेने भी बचपन में अकबर बीरबल की कई कहानियां सुनी है उन सभी में से मेरी सबसे पसंदीदा कहानी है “बीरबल की खिचड़ी” ! आईये आज आप भी अपने बचपन के दिनों को थोडा याद कर लीजिये I

बीरबल की खिचड़ी | अकबर बीरबल की कहानी | Akbar Birbal Stories In Hindi

Akbar Birbal Stories

एक समय की बात है राजा अकबर ओर बीरबल दोनों बगीचे में गुम रहे थे। अकबर ने बीरबल से कहा इस बार बहुत ठंड पड़ रही है। बीरबल जी हुजूर । इस बार ठंड कुछ ज्यादा ही है। तभी अकबर ने कहा कि में एक प्रतियोगिता रखता हूं जो कोई भी इस ठंडे पानी मे पूरी रात गुजारेगा में उसे 100 सोने के सिक्के दूंगा।

पास ही खड़ा राजा अकबर का सेनानायक बोला – हुजूर आपकी ये प्रतियोगिता पूरी नही हो सकती क्योंकि इतनी ठंड में कोई भी इस पानी मे पूरी रात नही गुजार सकता। अकबर ने भी उसकी बात मान ली और कहा लगता तो कुछ ऐसा ही है कि कोई भी इस प्रतियोगिता में भाग नही लगा।

लेकिन तभी बिरबल ने कहा हुजूर आपकी बात काटने के लिए मुझे समा करे लेकिन मुझे ऐसा नही लगता। इस शहर में कोई न कोई ऐसा जरूर होगा जो ये काम पूरा कर ही लेगा। अकबर ने कहा बीरबल तुम हमेशा सही होते हो लेकिन मुझे नही लगता कि इस बार तुम सही साबित होंगे। सेनानायक ने भी राजा अकबर की बात में ही हा भरी।

लेकिन बीरबल ने कहा इस शहर में बहुत से ऐसे लोग है जो इससे भी मेहनती काम करते है। उन्ही में से कोई तो ये काम कर ही लेगा। अकबर ने बीरबल से कहा चलो तुम्हारी बात मान लेता हूं। तुम शाम तक एक ऐसा आदमी ढूंढ कर लाओ जो हमारी ये चुनोती स्वीकार करता हो।

शाम हुई राजा अकबर के सामने बीरबल ने एक कमल नाम के व्यक्ति को बुलवाया। राजा ने उससे पूछा तुम ये कर लोगे। कमल ने कहा है में ये कर लूंगा। अकबर ने कहा मुझे तुम पर भरोसा नही हो रहा है। ऐसा करो इसकी प्रहरी करने के लिए 2 पहरेदार भेजो ओर उन्हें बोलना पूरी रात इसके पास ही रहे ओर इसपर कड़ी नजर रखे।

सुबह हुई ओर राजा अकबर अपने दरबार मे आये और बीरबल से पूछा कहा गया तुम्हारा वो आदमी। बीरबल ने कहा आपकी इजाजत हो तो में उसे अंदर बुलाऊ। अकबर ने हां हां क्यों नही में भी तो देखु क्या हाल है उसका।कमल ओर उसपर नज़र रख रहे पहरेदारो को अंदर बुलवाया गया। कमल के अंदर आते ही अकबर ने उसका हाल पूछा ओर कहा क्या तुम पूरी रात उस पानी मे खड़े रहे।

कमल ने कहा जी हुजूर में पूरी रात पानी मे खड़ा था। अकबर बोलै मुझे विश्वास नही होता। उसने अपने पहरेदारो से पूछा क्या ये सच बोल रहा है। पहरेदारो ने कहा जी हुजूर हम पूरी रात इसपर नज़र रखे हुए ही थे। राजा अकबर ने फिर भी विश्वास नही किया। क्योंकि पानी बहुत ठंडा था अगर कोई भी उस पानी मे रात गुजारता तो उसकी मृत्यु तय थी।

राजा ने कमल से पूछा तुम कैसे खड़े रहे। तब कमल ने कहा जब में पानी मे उतरा तब तो में ठंड के मारे काप रहा था। लेकिन जब मेरी नज़र सामने दिख रहे दिये पर पड़ी तो में पूरी रात उसे ही देखता रहा और रात गुजर गई।

अकबर बोला तो ये बात है तुम तभी अभी तक जिंदा हो। तुम्हे उस दिये से ताप मिलता रहा जिससे तुम्हे ठंड का अहसास नही हुआ। राजा बोला तुम बहुत किस्मत वाले हो कि में तुम्हे काल कोठरी में नही डाल रहा। चले जाओ यहाँ से। राजा बोलै देखो बीरबल इस बार तुम गलत साबित हुए। बीरबल ने राजा से माफ़ी मांगी।

थोड़ी देर बाद बीरबल बोलै समा करे महाराज मेरे घर पर एक अतिआवश्यक कार्य है। तो अभी मुझे घर जाना होगा। कृपया मुझे अनुमति दे। राजा ने अनुमति दे दी। शाम हुई तो राजा ने दरबार मे आते ही पूछा क्या बीरबल अभी तक नही लोटे।

राजा ने बीरबल को लाने अपने एक सिपाही को भेजा। लेकिन बीरबल ने कहा कि वो अभी कार्य कर रहे है। राजा ने ऐसे ही दो और सिपाहीयो को भेजा बीरबल को लाने। लेकिन बीरबल फिर भी नही आये। राजा ने सोचा क्यों न में खुद जाकर देख आता है आखिर बीरबल ऐसा क्या कार्य कर रहे है। राजा बीरबल के घर पहुँचे तो देखा कि बीरबल तो बाहर बैठे आराम कर रहे थे।

राजा ने बड़े ही गुस्से में बीरबल तुम यहाँ आराम कर रहे हो और हम वहां पर तुम्हारा कब से इंतजार कर रहे है। बीरबल ने कहा महाराज इंतज़ार के लिए माफी चाहता हूं। लेकिन क्या करूँ मेने ये खिचड़ी कब की चढ़ाई हुई है ये अभी तक नही पकी।

अकबर बोला बीरबल कई तुम पागल तो नही हो गए हो। खिचड़ी आग से कितनी ऊपर तंगी है। खिचड़ी को पकने के लिए ताप की जरूरत होती है। अगर खिचड़ी को इतनी ऊपर टँगाओगे तो वो नही पकने वाली। बीरबल ने कहा क्यों नही पक सकती। जब कमल को इतने दूर रखें दिए से ताप मिल सकता है तो ये खिचड़ी क्यों नही पक सकती।

राजा अकबर बीरबल की कई बात से समझ गए ओर बोले ठीक है बीरबल तुम हमेशा की तरह आज भी सही हो। तुम अपने आदमी के साथ दरबार मे आओ। 

राजा अकबर ने कमल को 100 सोने के सिक्के दिए और उसके साथ ही 100 सोने के सिक्के बीरबल को भी उपहार में दिए। अकबर बोले बीरबल तुमने एक राजा को गलत फैसला करने से बचा लिया। औऱ उन्हें उनकी गलती का अहसाह दिलाया ये बहुत बड़ी बात है।


Dear Readers : उम्मीद है दोस्तों आपको हमारी कहानी “बीरबल की खिचड़ी | अकबर बीरबल की कहानी | Akbar Birbal Stories In Hindi” की ये जानकारी पसंद आई होगी.

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