फरवरी में 28 दिन ही क्यों होते है ? जाने पूरी जानकारी

Hello दोस्तों Speed India 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. आज हम आपको “फरवरी में 28 दिन ही क्यों होते है | why february has only 28 days in hindi” के बारे में बताने जा रहे है. आपने कई बार सुना होगा की फरवरी में 28 दिन ही क्यों होते है. स्कूल में आपने भी अपने अध्यापको से कई बार इस सवाल को पूछा होगा. लेकिन क्या किसी से आपको सही जवाब मिला. अगर नहीं तो आईये हम आपको बताते है की फरवरी में 28 या 29 दिन ही क्यों होते है ?

आखिर क्यों होते है फरवरी महीने में 28 दिन ?

क्या कभी आपने सोचा है की साल के 12 महीनो मे से सिर्फ फरवरी में ही 28 या 29 दिन क्यों होते है. इस बात को जानने के लिए हमे इसकी गहराईयों में जाने की जरुरत है. की आखिर क्यों फरवरी में 30 और 31 दिन की बजाये 28 और 29 दिन होते है.

why february has only 28 days in hindi
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फरवरी महिना साल का सबसे छोटा महिना होता है. इस महीने में सिर्फ 28 दिन ही होते है लेकिन लीप वर्ष होने पर फरवरी में 29 दिन होते है. आजकल हम जिस कलेंडर का इस्तेमाल करते है वह रोमन कलेंडर पर आधारित है. पहले के कलेंडरो में महीनो किस शुरुआत मार्च महीने से होती थी. उस समय एक साल में 304 दिन होते थे, और एक साल में सिर्फ 10 महीने ही होते थे. 

कुछ समय बाद इस कलेंडर में कुछ बदलाव किये गए. बदलाव के चलते साल में 2 महीने ‘जनवरी और फरवरी’ और जोड़ दिए गए. यह वर्ष चन्द्र वर्ष के अनुसार बनाये गए. चाँद प्रथ्वी का पूरा चक्कर 354 दिनों में पूरा करता है. इसलिए जनवरी और फरवरी को 28-28 दिन का रखा गया. लेकिन रोम के लोग 28 अंक को अशुभ मानते थे.

जिसके चलते उन्होंने जनवरी में 1 और दिन जोड़ उसे 29 दिन का बना दिया. इस बदलाव के बाद साल में 12 महीने और 355 दिन होने लगे. अब आप सोच रहे होंगे की फरवरी में 1 दिन क्यों नहीं जोड़ा ? रोम के लोग फरवरी को अशुभ मानते थे. इस महीने में यह लोग मरे हुए लोगो की आत्मा की शांति के लिए प्रार्धना करते थे.

लेकिन इतने बदलावों के बावजूद कलेंडर में आने वाली मुश्किलें खत्म नहीं हुई. यह वर्ष अब मौसम के मुताबित नहीं बनाया गया था. क्योंकि इस वर्ष को चंद्रमा के अनुसार बनाया गया था. मौसम हमेशा सूर्य और प्रथ्वी के चक्कर के कारण बदलता है.

पुरानी कहानियों के अनुसार जुलियस सीजर ने 45 BC में कलेंडर को चंद्रमा के अनुसार न रखते हुए सूर्य के अनुसार रखा. इस बदलाव के बाद हर वर्ष में 10 दिन और जोड़ दिए गए. इसके कारण अब हर वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का हो गया.

क्योंकि सूर्य प्रथ्वी का चक्कर 365 दिन और 6 घंटे में पूरा करता है. पीछे बचे इन 6 घंटो को हर साल बचा लिया जाता है और हर चोथे साल मिला कर एक दिन फरवरी महीने में जोड़ दिया जाता है. इस वर्ष को हम लीप वर्ष कहते है. कहानियों और ग्रंथो के अनुसार इसी कारण फरवरी में 28 दिन होते है.


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