होली कब और क्यों मनाई जाती है ? होली से जुड़ा इतिहास और कथा | Holi In Hindi

होली क्यों मनायी जाती है ? : नमस्कार दोस्तों, Speed India 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है और आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं. आज हम आपको “होली कब और क्यों मनाई जाती है ? होली से जुड़ा इतिहास और कथा | Holi In Hindi” की पूरी जानकारी देने जा रहे है. होली का त्यौहार भारतीय और नेपाली लोगो के अलावा पूरी दुनिया में जहा भी भारतीय रहते है उनके द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. आप सभी होली मनाते है लेकिन क्या आप जानते है आखिर क्यों मनायी जाती है होली ? आईये आज हम आपको पूरी जानकारी के साथ बताते है…

होली से जुडी इस पोस्ट में आप क्या-क्या जानेंगे ?

  • होली कब मनायी जाती है ?
  • होली क्यों मनायी जाती है ? | Why is holi celebrated in hindi
  • होली से जुड़ा इतिहास क्या है ? | होलिका दहन की कथा.

होली कब और क्यों मनाई जाती है ? होली से जुड़ा इतिहास और कथा | Holi In Hindi

होली क्यों मनायी जाती है ?

होली हमारे भारत देश के सबसे पुराने त्योहारों में से एक है. होली कितने पुराने समय में मनाई जा रही है इसकी सही जानकारी नहीं है लेकिन होली के विषय में इतिहास, पुराण और साहित्य में कई कथाए सुनने को मिलती है. आईये जानते है होली से जुड़ा इतिहास और कथाए क्या है ?

1. होली कब मनाई जाती है ?

होली का त्यौहार प्रमुख तोर पर हिन्दुओं और नेपाली लोगो द्वारा मनाया जाता है. यह त्यौहार वसंत ऋतू में मनाया जाने वाला सबसे प्रमुख त्यौहार है. होली का त्यौहार हिंदू पंचाग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. होली का त्यौहार दो दिन मनाया जाता है जिसमे पहले दिन शाम के समय होली जलाई जाती है जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है. और दुसरे दिन लोग सुबह से दोपहर तक एक दुसरे को रंग-गुलाल लगाते है और एक-दुसरे से गले मिल कर होली की शुभकामनाएं देते है. दोपहर के बाद स्नान करके नए कपडे पहनकर अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के घर जाते है और मिठाइयाँ खाते है.

2. होली क्यों मनाई जाती है ? | Why is holi celebrated in hindi

होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. इसके पीछे कई सारी कथाए प्रचलित है. लेकिन होलिका दहन की कथा सबसे ज्यादा प्रचलित है. होली को लेकर हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की कथा भी प्रचलित है. इस कथा के अंतर्गत होलिका ने पहलाद को अग्नि में जलाने का प्रयास किया लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका खुद ही अग्नि में भष्म हो गयी थी. तभी से होलि का त्यौहार मनाया जाता है. 

3. होली से जुड़ा इतिहास और होलिका की कथा.

प्राचीनकाल में अत्याचारी राक्षस राज हिरण्यकश्यप ने भगवान की प्रार्थना कर एक वरदान पा लिया. की उसे इस संसार का कोई भी जीव जन्तु, देवता, राक्षस या मनुष्य उसे मार ना सके. नाहि वह रात में मरे, नाहि दिन में, नाहि वो प्रथ्वी पर मरे और नाहि आकाश में, ना घर में मरे, ना ही बाहर या तक की कोई भी हथियार हो उसकी मृत्यु ना हो. ऐसा वरदान पा कर वो अत्यंत निरंकुश बन बेठा. 

हिरण्यकश्यप के घर पहलाद जैसा ईश्वर और परमात्मा में अटूट विश्वास करने वाला भक्त पुत्र पैदा हुआ. पहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और पहलाद पर भगवान विष्णु की कृपादृष्ठि थी. हिरण्य कश्यप ने पहलाद को आदेश दिया की वह उसके अलावा किसी भी और की पूजा ना करे.

पहलाद द्वारा उसकी बात न मानने पर हिरण्यकश्यप उसे जान से मारने पर उतारू हो गया. हिरण्यकश्यप ने पहलाद को मरने के कई प्रयास किये लेकिन सभी प्रयासों में वह विफल रहा. क्योंकि पहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था इसलिए उस पर भगवान विष्णु की कृपादृष्ठि थी. 

इसके बाद हिरण्य कश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलवाया. होलिका को अग्नि से बचने कका वरदान था जिससे वो कभी भी आग में नहीं जल सकती थी. उसे वरदान में ऐसी चादर मिली हुई थी जो आग में नहीं जलती थी. हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की सहायता से पहलाद को आग में जलाने की योजना बनाई.

होलिका बालक पहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बेठ गयी. लेकिन प्रभु कृपा से होलिका की चादर पहलाद पर जा गिरी जिससे होलिका उस अग्नि में भष्म हो गयी लेकिन पहलाद को कुछ भी नहीं हुआ. इस प्रकार पहलाद को मरने के प्रयास में होलिका की मृत्यु को गयी. इसी दिन के बाद से ही होली का त्यौहार मनाया जाने लगा.

इसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप को वध कर दिया. भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप के वरदान को देखते हुए उसे अपनी जांगो पर रख कर सुबह और शाम के समय के बिच में उसे मृत्यु दे दी. 


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