मोबाइल vs आपके रिश्ते – नैतिक कहानी | Moral Story In Hindi

Moral Story In Hindi : नमस्कार दोस्तों, Speed India 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. आज हम आपके लिए “मोबाइल vs आपके रिश्ते – नैतिक कहानी | Moral Story In Hindi” की जानकारी लेकर आये है. आज कल की दुनिया में सभी लोग अपने अपनों से बहुत दूर होते जा रहे है. और उसकी सबसे बड़ी वजह उनकी जॉब नहीं बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी का सही से इस्तेमाल नहीं करना है. आज कल सभी लोग online friends बना रहे है लेकिन क्या आपने सोचा की आपके offline friends कैसे है. आज की हमारी नैतिक कहानी का उद्देश्य यही है की आप अपने अपनों को अपना कीमती समय दे. रिश्तो की अहमियत को समझे. ज़िन्दगी का हर समय अनमोल है. इसी कथन के साथ शुरू करते है हमारी आज की नैतिक कहानी – मोबाइल vs आपके रिश्ते.

मोबाइल vs आपके रिश्ते – नैतिक कहानी | Moral Story In Hindi

Moral Story In Hindi

मोबाइल vs आपके रिश्ते : एक बार एक स्कूल की अद्यापिका ने बच्चो का टेस्ट लिया. और टेस्ट की कॉपीया जाचने के लिए घर ले आई. बहुत सारी कॉपियो को जाँचने के बाद एक बच्चे की कॉपी को देखते ही देखते उनकी आँखों में आंसू आ गये. कुछ देर बाद ही ऑफिस से घर आये पति ने उससे पूछा की क्या हुआ क्यों रो रही हो.

अद्यापिका ने बताया की आज सुबह ही मेने स्कूल में एक टेस्ट लिया था. उस टेस्ट का विषय था की आप अपने मन की सबसे बड़ी ख्वाहिश पर कुछ लाइन लिखे. और उन सभी में से एक बच्चे ने लिखा है की भगवान उसे मोबाइल बना दे.

यह सुन कर पति जोर-जोर से हसने लगा और बोला तुम सिर्फ इतनी से बात पर रो रही थी. अद्यापिका बोली आगे तो सुनो – आगे बच्चे ने लिखा है यदि में मोबाइल बन जाऊ तो घर में मेरी एक खासं जगह होगी. सारा परिवार मेरे आसपास रहेगा. जब में कुछ भी बोलूँगा सभी मुझे ध्यानपूर्वक सुनेंगे. मुझे किसी भी बात पर रोका-टोका नहीं जायेंगा और ना ही उल्टे सवाल होंगे. पापा ऑफिस से आने के बाद थके होंने के बावजूद मेरे साथ बैठेंगे. मम्मी को जब किसी बात से तनाव होगा वो मुझे डाटेंगी नहीं बल्कि मेरे साथ बैठेंगी. मेरे बड़े भाई बहन मुझे अपने पास रखने के लिए झगड़ा करेंगे. और हा जब में बंद भी होऊंगा तब भी मेरी खास देखभाल होगी. मोबाइल के रूप में में सभी को खुशी भी दे पाउँगा.

यह सब सुनने के बाद पति भी थोडा गंभीर हो गया और बोला है भगवान बिचारा बच्चा उसके परिवार वाले तो उस पर जरा सा भी ध्यान नहीं देते. इसके बाद उसकी पत्नी ने रोते हुए ही उसकी तरफ देखा और बोली जानते हो ये बच्चा कोन है ? हमारा अपना बच्चा. हमारा चिंटू.

मोबाइल vs आपके रिश्ते – नैतिक कहानी से हमे ये सीख मिलती है, की हमे हमारे रिश्तो की अहमियत समझनी चाहिये. क्या आपको नहीं लगता आपके रिश्ते एक मोबाइल से ज्यादा कीमती है. आपका जीवन अनमोल है इसे 5 इंच की स्क्रीन में मत बांधिए.


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