रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है ? रक्षा बंधन का रहस्य और इतिहास

रक्षा बंधन की शुरुआत कैसे और क्यों हुई थी ?

रक्षा बंधन साधारणतया श्रावणमास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है ! साधारणतया रक्षा बंधन के दिन बहने अपने भाइयो को राखी बांधती है !  परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओ और परिवार की छोटी लड़कीयो द्वारा समानी सम्न्धियो ! जेसे पुत्री द्वारा पिता को भी राखी बांधी जाती है ! कभी – कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रथिस्थित व्यक्ति को भी राखी बांधी जाती है !

रक्षा बंधन से जुड़ा रहस्य
रक्षा बंधन का इतिहास

आज कल तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को भी राखी बांधने की परम्परा शुरु हो चुकी है ! अमरनाथ की धार्मिक यात्रा भी गुरुपूर्णिमा से प्रारंभ होकर रक्षा बंधन पर ही पूरी होती है ! कहते है इस दिन अमरनाथ का हिमानी शिवलिंग भी अपने पूर्ण आकार को प्राप्त होता है ! राखी के त्यौहार के दिन अमरनाथ की गुफा में प्रतेक वर्ष मेले का आयोजन होता है !

दोस्तों राखी के त्यौहार को पुरे देश में लोग अलग-अलग तरीके से अपनी मान्यताओ के अनुसार मानते है ! पर इन सब के बावजूद क्या आपको रक्षा बंधन के इतिहास के बारे में पता है ? क्या आपको पता है सबसे पहला रक्षासूत्र किसने किसको बाँधा था ? और क्या था इसके पीछे का कारण ? और कैसे हुयी रक्षा बंधन की सुरुआत !

रक्षा बंधन का इतिहास इतना पुराना है ! ये जान कर भी आप को ताजुब होगा की सबसे पहला रक्षा बंधन पृथ्वीलोक में नहीं बल्कि किसी दुसरे लोक में मनाया गया था ! रक्षा बंधन के संधर्भ में हर युग और काल में अलग-अलग धारणाये बनी ! दोस्तों इन सभी बातो पर आज हम आपको हमारे इस आर्टिकल में पूरी जानकारी देंगे !

रक्षा बंधन का रहस्य और इतिहास (The complete secret and history of Raksha Bandhan)

रक्षा बंधन से जुडी पहली कथा – राजा बलि ने जब एक सो दस यग्य पूर्ण कर लिये तब देवताओ का डर बढ़ गया ! उन्हें ये भय सताने लगा की यज्ञो की शक्ति से राजा बली स्वर्गलोक पर भी अपना अधिकार कर लेंगे ! इसीलिए सभी देव स्वर्गलोक की रक्षा हेतु भगवान विष्णु के पास पहुचे ! तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर ब्राह्मण का वेश धारण करकर ! राजा बली के पास भिक्षा मांगने पहुचे !

गुरु के मना करने के बावजूद भी राजा बली ने तीन पग भूमि का दान उस ब्राह्मण रूपी भगवान विष्णु को दान कर दिया ! इस दोरान विष्णु जी वामन रूप में एक पग से देव्लोक को और दुसरे पग से पृथ्वी लोक को नाप लिया ! अब बारी थी तीसरे पग की… वामन का तीसरा पैर आगे बढ़ते ही राजा बली परेशान हो गए ! वे समज ही नहीं पा रहे थे की अब क्या करे ! तभी उन्होंने आगे बढ़कर अपना सिर वामन देव के चरणों में रख दिया ! और कहा आप अपना तीसरा पैर यहाँ पर रख दे !

रक्षा बंधन से जुड़ा रहस्य
रक्षा बंधन का पूर्ण रहस्य और इतिहास

इस तरह भगवान विष्णु ने राजा बली से स्वर्ग एवम पृथ्वी पर रहने का अधिकार छीन लिया ! और राजा बली राशातल लोक में रहने के लिए विवश हो गए ! कहते है जब राजा बली रशातल में चला गया ! तब बली ने अपनी भगती के बल पर भगवान को रातो-दिन अपने सामने रहने का वचनं ले लिया ! और भगवान विष्णु को अपना द्वार पाल बना दिया !

इस वजह से महालक्ष्मी जो भगवान विष्णु की अर्धाह्गनी थी वे परेशान हो गए ! भगवान विष्णु के घर न लोटने से परेशान महालक्ष्मी जी को नारघ जी ने एक उपाय बताया ! उस उपाय का पालन करते हुए लक्ष्मी जी ने राजा बली के पास जाकर उसे राखी बाँधी और अपना भाई बनाया ! और उपहार स्वरुप अपने पति भगवान विष्णु को अपने साथ ले आयी ! उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी ! और उस दिन से ही रक्षाबंधन मनाया जाने लगा ! आज भी कही जगह इस कथा को आधार मान कर रक्षाबंधन मनाया जाता है

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रक्षा बंधन से जुडी दूसरी पौराणिक कथा (Second legend related to Raksha Bandhan)

भविष्य्पुरण के अनुसार प्राचीन काल में एक बार बारह वर्षो तक देवो और असुरो में महासंग्राम होता रहा ! जिसमे देवताओ की हार हो रही थी ! भगवान इंद्र गबराकर ब्रहस्पति के पास गए ! कहते है उस समय वहा पर इंद्र की पत्नी सूची भी मोजूद थी !

इंद्र की व्यधा जानकर इन्द्राणी ने कहा – हे स्वामी में विधान पूर्वक रक्षासूत्र तेयार करुँगी ! उसे आप स्वस्थिवचन पूर्वक ब्राह्मणों से बंध्वा लिजियेगा ! उसके बाद आप अवस्यही विजय होंगे ! कहते है इस रक्षासूत्र के प्रभाव से इंद्र सहित देवताओ की विजय हुई ! और तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार ब्राह्मणों के द्वारा मनाया जाने लगा ! उस दिन से श्रावन पूर्णिमा के दिन ये धागा बांधने की प्रथा चली आ रही है ! ये धागा धन,शक्ति,हर्ष और विजय देने में पूरी तरह से सामर्थ माना जाता है !

महाभारत और रक्षा बंधन से जुड़ा रहस्य (The secret to the Mahabharata and Raksha Bandhan)

ये मान्यता महाभारत युद्ध से जुडी है ! जिसके भीतर दो विभिन कथाए मोजूद है ! जिसके अनुसार महाभारत में श्रीकृष्ण ने सिसुपाल का वध अपने चक्र से किया था ! शिसुपाल का सिर कटने के बाद जब चक्र वापस श्रीकृष्ण के पास पंहुचा तो उस समय कृष्ण की उंगुली कट गयी ! ततपश्चात उनकी उंगुली से रक्त निकलने लगा !

रक्षा बंधन से जुड़ा रहस्य
महाभारत और रक्षा बंधन से जुड़ा रहस्य

यह देख कर पांड्वो की पत्नी द्रोपती से रा न गया ! उसने तुरंत ही अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर श्रीकृष्ण की उंगुली पर बाँध दिया ! कहते है तभी श्रीकृष्ण ने भावुक हिकार द्रोपती को एक वचन दिया था ! और कहा इस साड़ी की लाज वो रखेंगे और ता उम्र अपमी बहन की रक्षा करेंगे ! और यह दिन श्रावन मास की पूर्णिमा का दिन था ! श्रीकृष्ण ने उस उपकार का बदला चिरहरण के समय उनकी साड़ी को बड़ा कर चुकाया ! कहते है परस्पर एक दुसरे की रक्षा और सहयोग की भावना रक्षा बंधन के त्यौहार में यही से प्रारम्भ हुयी थी !

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एक दूसरी कथा के अनुसार जब युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पुछा की में संखठोको कैसे पार कर सकता हु ! तब भगवान कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्यौहार मनाने की सलाह दी ! उनका कहना था राखी कके इस रेशमी धागे में वो शक्ति है ! जिससे आप हर आपत्ति से मुक्ति पा सकते है !

अगर हम थोडा अपने इतिहास का अद्यन करे ! तो हमे यह पता चलेगा की जब राजपूत लड़ाई पर जाते थे ! तब महिलाये उनके माते पर कुमकुम का तिलक और हाथ पर रेशमी धागा बांधती थी ! इस विश्वास के साथ की यह  धागा उन्हें विजय दिलाएगा ! और साथ ही साथ उन्हें वापस भी लाएगा !

दोस्तों रक्षा बंधन के सम्बन्ध में ऐसी बहुत सी मान्यताये प्रचलित है ! जो हमारे इतिहास में वर्णित है ! रक्षाबंधन में इस्तेमाल होने वाले रक्षासूत्र में वो शक्ति है जो बुरी से बुरी बाधाओं को दूर कर सकती है ! इसी लिए इसे पुरे भाव के साथ किसी को बांधना चाहिए ! ताकि वो हर बाधाओं से दूर रहे और आपको हर बाधाओं से दूर भी रखे !

 


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