रानी पद्मावती की कहानी और इतिहास | Padmavati History And Story In Hindi

Hello दोस्तों Speed India 24 आपका हार्दिक स्वागत करता है. रानी पद्मावती को पद्मिनी के नाम से भी जाना जाता था. रानी पद्मावती चितोड़ के राजा रतनसिंह की जीवनसाथी थी. रानी पद्मावती पुरे भारत में अपनी सुंदरता के कारण जानी जाती थी. आज हम आपको “रानी पद्मावती की कहानी और इतिहास | Rani Padmavati History And Story In Hindi” के बारे में पूरी जानकारी देने वाले है. आईये श्री गणेश करते है हमारी आज की पोस्ट रानी पद्मिनी कोन थी और इनका इतिहास क्या है ?

Rani Padmavati Biography In Hindi

Rani Padmini History in Hindi
Rani Padmini History in Hindi

नाम :- पद्मिनी/पद्मावती

पिता/माता :- राजा गंधर्व सेन, रानी चंपावती

जन्म स्थल :- सिंहल द्वीप

मृत्यु :- चितोड़

धर्म :- हिंदू

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रानी पद्मावती की कहानी और इतिहास | Padmavati History & Story In Hindi

PADMAVATI HISTORY AND STORY IN HINDI
पद्मावती का इतिहास और कहानी

Rani Padmavati History In Hindi – रानी पद्मावती अपने पिता राजा गंधर्व सेन और रानी चंपावती के साथ रहती थी. रानी पद्मावती का स्वयंवर चितोड़ के राजा रतनसिंह के साथ हुआ था. स्वयंवर के बाद रानी पद्मावती रतनसिंह के साथ चितोड़ रहने चली गयी. रानी पद्मावती बहुत ही सुंदर थी. और उनकी सुंदरता की प्रशंसा पुरे देश में हो रही थी.

राजा रतनसिंह के दरबार में राघव चेतन नाम का एक संगीतकार था. एक दिन किसी कारण वश उसे दरबार से बेइज्ज़त करके बाहर निकाल दिया गया. राघव चेतन ने अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए वो दिल्ली के सुल्तान अलाउदीन खिलजी के पास पंहुचा. राघव चेतन ने रतनसिंह से बदला लेने की चाह के कारण अलाउदीन खिलजी को चितोड़ की रानी पद्मावती की खूबसूरती के बारे में बताया. राघव चेतन ने सुल्तान को बताया की पद्मावती जैसी सुंदर स्त्री पुरे देश में नहीं है. उसका रंग ऐसा है की अगर आप उसे अँधेरे में भी देख ले तो लगेगा की पूर्णिमा का चाँद निकल आया है. 

पद्मावती के बारे में इतना कुछ सुन सुल्तान खिलजी को पद्मावती को अपना बनाने की चाह उत्पन हुई. अलाउदीन ने तुरंत चितोड़ जाने की तेयारी कर ली. चितोड़ पहुचकर सुल्तान खिलजी ने राजा रतनसिंह को संदेश भेजा, और लिखा की वो रानी पद्मावती को अपनी बहन सम्मान मानता है और उनसे एक बार मिलना चाहता है.

राजा रतनसिंह सुल्तान की मनसा तो जानते थे. लेकिन सुल्तान के क्रोध से अपने राज्य को बचाने के लिए वो इस बात से सहमत हो गए. रानी पद्मावती सुल्तान को अपनी एक जलक दिखाने के लिए तेयार तो हो गयी लेकिन केवल प्रतिबिम्ब में. इसके लिए सुल्तान अलाउदीन को किले के एक उच्चे बुर्ज में खड़ा कर दिया गया. उसके सामने एक आइना लगाया गया. उस बुर्ज के अकदम निचे एक तलाब था. जो बुर्ज में लगे आईने में सांफ दिखाई देता था. तालाब के किनारे रानी पद्मावती कड़ी हो गयी. अब रानी पद्मावती का प्रतिबिम्ब तलब के पानी में पड़ा और तालाब का प्रतिबिम्ब उस आईने में दिखाई दिया. जहा से पहली बार सुल्तान अलाउदीन खिलजी ने रानी पद्मावती के रूप को देखा.

पद्मावती के रूप के बारे में जितना खिलजी ने सुना था उससे कई ज्यादा पाया. पद्मावती की सुंदरता को देखते ही अलाउदीन खिलजी ने उसे अपना बनाने की ठान ली. उसने चितोड़ पर आक्रमण कर दिया और राजा रतनसिंह को बंदी बना लिया. अलाउदीन खिलजी ने रतनसिंह के सामने पद्मावती को उसे सोपने की मांग की. राजा रतनसिंह को उनके दो साथियों गोरा और बादल ने बड़े ही सावधानी से अलाउदीन खिलजी की केद से निकाल दिया. 

सुल्तान खिलजी इस बात से बहुत आगबबुला हो गया और उसने तुरंत ही किले पर आक्रमण कर दिया. इस दोरान राजा रतनसिंह वीरगति को प्राप्त हो गए. यह सुनकर पद्मावती ने सोचा की सुल्तान की सेना चितोड़ के सभी पुरुषो को मार देगी. अब चितोड़ की सभी महिलाओ के सामना दो ही विकल्प थे या तो वो विजय सेना के समक्ष अपना निरादर सहे या फिर जौहर के लिए प्रतिबद्ध हो जाये. सभी महिलाओं का पक्ष जौहर की तरफ ही था. तब एक महान चिता जलाई गयी और रानी पद्मावती के साथ चितोड़ की सभी महिलाओ ने अपनी आहुति दे दी.

सुल्तान खिलजी ने किले पर विजय प्राप्त कर ली. लेकिन जब अलाउदीन खिलजी ने किले में प्रवेश किया. तब उसे किले में राख और जली और हड्डियों के सिवा कुछ भी नहीं मिला. 

आज भी रानी पद्मावती और चितोड़ की महिलाओं द्वारा किये गए जौहर को लोग गर्व से याद करते है. रानी पद्मावती के बलिदान को इतिहास में सुवर्ण अक्षरों से लिखा गया है।

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